हुमायूं का 'हेलिकॉप्टर ऑफर' और राजनीति में मचता नया बवंडर
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में इन दिनों कयासों और दावों का दौर चरम पर है। तृणमूल से निलंबित विधायक और जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने एक ऐसा सियासी दांव चला है, जिसने राज्य के विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। कबीर ने दावा किया है कि यदि माकपा और कांग्रेस उनके गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो वे आगामी चुनाव में शून्य से सीधे सत्ता के गलियारे तक पहुंच सकते हैं। इस दावे के साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं के लिए हेलिकॉप्टर ऑफर पेश कर दिया है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हुमायूं कबीर ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि यदि विपक्षी गठबंधन उनके साथ आता है, तो वे हेलिकॉप्टर के जरिए धुआंधार चुनाव प्रचार की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। जब उनसे इस बेहद खर्चीले प्रचार अभियान के वित्तपोषण पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़े ही रहस्यमयी ढंग से बंगाल की पुरानी कहावत का सहारा लेते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो पैसे गौरी सेन देंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह गौरी सेन कौन है कोई बड़ा उद्योगपति या कोई अन्य गुप्त शक्ति। उनके इस बयान ने यह रहस्य गहरा दिया है कि आखिर कबीर के पास इतना फंड कहां से आने वाला है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे रोचक पहलू माकपा के भीतर का अंतर्विरोध है।
हुमायूं कबीर ने माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम की जमकर तारीफ की है, जबकि पार्टी के ही कद्दावर नेता सुजन चक्रवर्ती पर तीखे तंज कसे हैं। कबीर का कहना है कि सलीम एक काबिल नेता हैं, लेकिन सुजन चक्रवर्ती कभी खुद चुनाव जीतने का माद्दा नहीं दिखा पाए। कबीर ने यहां तक प्रस्ताव दे दिया कि यदि मोहम्मद सलीम मुर्शिदाबाद से चुनाव लडऩे का मन बनाते हैं, तो वे उनके सम्मान में अपनी सीट छोडऩे को भी तैयार हैं। इस बयान के बाद सुजन चक्रवर्ती ने भी सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें हुमायूं जैसे व्यक्ति से किसी सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है, जो अपनी राजनीतिक निष्ठाएं लगातार बदलते रहते हैं। दरअसल, इस विवाद की जड़ें कुछ दिनों पहले एक पांच सितारा होटल में हुमायूं कबीर और मोहम्मद सलीम के बीच हुई गुप्त मुलाकात में छिपी हैं। इस बैठक ने माकपा के भीतर भी दो फाड़ कर दिए हैं। सुजन चक्रवर्ती और उनके समर्थक इस मुलाकात का विरोध कर रहे हैं, जबकि पार्टी के भीतर इसे सलीम की कार्यशैली पर एक परोक्ष हमला माना जा रहा है। क
बीर ने अपने इरादे साफ करते हुए कहा है कि वे खुद दो महीने तक हेलिकॉप्टर से प्रचार करेंगे और इसके लिए बेलडांगा में एक स्थायी हेलिपैड का निर्माण भी कराया जा रहा है। इधर, तृणमूल ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय हास्य का विषय बना दिया है। पार्टी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने तंज कसते हुए कहा कि हुमायूं अब हेलिकॉप्टर पैकेज बेच रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या मोहम्मद सलीम इस हवाई लालच में आकर ट्रैकसूट पहनकर उड़ान भरने को तैयार होते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पूरी कवायद पर कड़ी नाराजगी जताई है।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि हुमायूं और सलीम की जुगलबंदी वास्तव में उनके जमीनी संगठन को तोडऩे की एक सोची-समझी साजिश है। बंगाल की राजनीति में इस नए 'ट्रायंगल' ने आने वाले चुनावों से पहले समीकरणों को बेहद पेचीदा बना दिया है।